अंकों की व्यवस्था-1
1.
मैं एक, एक वस्तु दिखाऊं
मैं ही गिनती शुरू कराऊं
जोड़ जोड़ अपने में मैं ही
गिनती को आगे ले जाऊं
2.
कोई अंक जब बाएं आता
चक्रों की संख्या बतलाता
अंक चूकि संख्या में दस हैं
यहां दस गुणा मान बताता
3.
मैं हूं शून्य, जहां मैं आऊं
नहीं है कोई, मैं बतलाऊं
अपने नौ साथी हैं जिन्हें
पता ठिकाना देता जाऊं
4.
दाएं अंक सब एक एक आते
क्रम से एक एक मान बढ़ाते
एक गुणा मान यहां पर आता
पहले जितना बना रह जाता
अंगरूप में अंक-चक्र पूराते
कारण यही इकाई कहलाते
5
क्रम में आते लगातार अंक
चक्र चक्र जब बढ़ते जाते
एक एक फिर, बाएं आकर
चक्रों की वे संख्या बतलाते
दस के दल से चक्र बने तो
जगह दहाई के कहे जाते
—- प्रभुनाथ प्रसाद
सुगौली