अभाज्य संख्याएँ गणित में रुचि रखने वाले लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती रही हैं । इन संख्याओं के लिए अभी तक कोई सूत्र नहीं मिला है, जो केवल इन संख्याओं को क्रमागत व्यक्त कर सके । यह बताना भी श्रमसाध्य है कि किसी दी गई संख्या तक कितनी अभाज्य संख्याएँ प्राप्त की जा सकती हैं । पाठ्यपुस्तकों में ईरोटोस्थनीज के छलनी (sieve of Eratosthenes) विधि का वर्णन है, जिसके द्वारा अभाज्य संख्याओं को निकाला जाता है ।
दी गई विधि को थोड़ा संक्षिप्त कर मैंने इन संख्याओं को निकालने में श्रम की बचत करने का प्रयास किया है । साथ ही इसे आसान तरीका से बताने का प्रयास किया है।
किसी दी गई संख्या तक 3 से बड़ीअभाज्य संख्याओं का पता लगाने के लिए
(a) उस संख्या तक 6 का गुणज लिखें।
(b) 6 के गुणजों में 1 घटाकर तथा 1 जोड़कर संख्याओं को लिख लें।
(c) 1 जोड़ने और घटाने के बाद प्राप्त संख्याओं को दी गई संख्या के वर्गमूल तक की अभाज्य संख्याओं से भाग दें। विभाजित हो जाने वाली संख्याओं को चिह्नित कर लें। इस विधि में 5 से छोटी संख्याएँ पैटर्न में नहीं हैं, इसलिए विभाजित करने की क्रिया की शुरुआत 5 से ही करेंगे।
(d) भाग देने पर जो संख्याएँ विभाजित नहीं होती हैं, वे सभी दी गई संख्या तक की 3 से बड़ी अभाज्य संख्याएँ होती हैं।
जैसे –
100 तक अभाज्य संख्याओं का पता लगाने के लिए हम 100 तक 6 के गुणजों को लिखेंगे, फिर उनमें 1 जोड़ने और 1 घटाने के बाद प्राप्त संख्याओं को 100 के वर्गमूल ( 10 ) से छोटी अभाज्य संख्याओं यथा 5 और 7 से भाग देकर चिह्नित कर लेंगे । अब शेष बचीं 100 तक की अचिन्हित संख्याएँ ही 3 से बड़ी अभीष्ट अभाज्य संख्याएँ हैं ।
6 का गुणजों में 1 जोड़कर और घटाकर लिखने की जगह
5 और 7 में 6 को बार-बार जोड़कर भी लिखा जा सकता है ।
अभाज्य संख्याओं के कुछ लक्षण
(1) 2 और 3 को छोड़कर कोई अभाज्य संख्या 6 के गुणज से एक कम या एक अधिक होती है । अर्थात् 2 और 3 को छोड़कर बाकी किसी अभाज्य संख्या में 6 से भाग देने पर 5 या 1 शेष आता है। इसप्रकार अभाज्य संख्याओं को दो भागों में बांटा जा सकता है – (a) अभाज्य संख्याएँ जिनमें 6 से भाग देने पर शेष 5 आता है , और (b) अभाज्य संख्याएँ जिनमें 6 से भाग देने पर शेष 1 आता है ।
(2) 5 से बड़ी अभाज्य संख्याओं के ईकाई स्थान पर 1,3,7 या 9 होता है ।
(3) शेष 1 वाली अभाज्य संख्याओं के अंकों का अंतिम योग 1,4,या 7 तथा शेष 5 वाली अभाज्य संख्याओं के
अंकों का अंतिम योग 3,5 या 8 होता है। जैसे- 97 के अंकों का योग= 9+7=16, 16 के अंकों का योग= 1+6=7
इस प्रकार 97 के अंकों का अंतिम योग 7 प्राप्त हुआ।
(4) दो समान प्रारुप वाली अभाज्य संख्याओं का गुणनफल शेष 1 वाले प्रारूप में तथा असमान प्रारूप वाले का गुणनफल शेष 5 वाले प्रारूप में होता है।
बीजगणितीय रूप में इसप्रकार व्यक्त कर सकते है –
(1) 2 और 3 को छोड़कर सभी अभाज्य संख्याओं को 6n +_ 1 के रूप में व्यक्त किया जा सकता है , जहाँ n एक प्राकृत संख्या है ।
(2) यदि सभी अभाज्य संख्याओं को P से, 6n+1 प्रारूप की अभाज्य संख्याओं को P+, तथा 6n-1 प्रारूप की अभाज्य संख्याओं को P- से दिखाया जाय तो
P = P+ U P-
(3) P+✖P+= P+, P-✖P-=P+, P-✖P+=P-, P+✖P-=P-